Friday, August 11, 2017

Anokhi Tarkeeb (Hindi Moral Story For Kids)


अनोखी तरकीब

- पराग ज्ञानदेव चौधरी

बहुत पुरानी बात है। एक अमीर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी। बहुत तलाश करने के बावजूद सामान न मिला और न ही चोर का पता चला। तब अमीर व्यापारी शहर के काजी के पास पहुँचा और चोरी के बारे में बताया।
सबकुछ सुनने के बाद काजी ने व्यापारी के सारे नौकरों और मित्रों को बुलाया। जब सब सामने पहुँच गए तो काजी ने सब को एक-एक छड़ी दी। सभी छड़ियाँ बराबर थीं। न कोई छोटी न बड़ी।

Anokhi Tarkeeb (Hindi Moral Story For Kids)सब को छड़ी देने के बाद काजी बोला, "इन छड़ियों को आप सब अपने अपने घर ले जाएँ और कल सुबह वापस ले आएँ। इन सभी छड़ियों की खासियत यह है कि यह चोर के पास जा कर ये एक उँगली के बराबर अपने आप बढ़ जाती हैं। जो चोर नहीं होता, उस की छड़ी ऐसी की ऐसी रहती है। न बढ़ती है, न घटती है। इस तरह मैं चोर और बेगुनाह की पहचान कर लेता हूँ।"

काजी की बात सुन कर सभी अपनी अपनी छड़ी ले कर अपने अपने घर चल दिए।

उन्हीं में व्यापारी के यहाँ चोरी करने वाला चोर भी था। जब वह अपने घर पहुँचा तो उस ने सोचा, "अगर कल सुबह काजी के सामने मेरी छड़ी एक उँगली बड़ी निकली तो वह मुझे तुरंत पकड़ लेंगे। फिर न जाने वह सब के सामने कैसी सजा दें। इसलिए क्यों न इस विचित्र छड़ी को एक उँगली काट दिया जााए। ताकि काजी को कुछ भी पता नहीं चले।'

चोर यह सोच बहुत खुश हुआ और फिर उस ने तुरंत छड़ी को एक उँगली के बराबर काट दिया। फिर उसे घिसघिस कर ऐसा कर दिया कि पता ही न चले कि वह काटी गई है।

अपनी इस चालाकी पर चोर बहुत खुश था और खुशीखुशी चादर तान कर सो गया। सुबह चोर अपनी छड़ी ले कर खुशी खुशी काजी के यहाँ पहुँचा। वहाँ पहले से काफी लोग जमा थे।
काजी १-१ कर छड़ी देखने लगे। जब चोर की छड़ी देखी तो वह १ उँगली छोटी पाई गई। उस ने तुरंत चोर को पकड़ लिया। और फिर उस से व्यापारी का सारा माल निकलवा लिया। चोर को जेल में डाल दिया गया।

सभी काजी की इस अनोखी तरकीब की प्रशंसा कर रहे थे।


Thursday, August 10, 2017

Emaandaari (Hindi Moral Story For Kids)

Emaandaari (Hindi Moral Story For Kids)

ईमानदारी

कहानी - चित्रा रामास्वामी

विक्की अपने स्कूल में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह को ले कर बहुत उत्साहित था। वह भी परेड़ में हिस्सा ले रहा था।

दूसरे दिन वह एकदम सुबह जग गया लेकिन घर में अजीब सी शांति थी। वह दादी के कमरे में गया, लेकिन वह दिखाई नहीं पड़ी।

"माँ, दादीजी कहाँ हैं?" उसने पूछा।

"रात को वह बहुत बीमार हो गई थीं। तुम्हारे पिताजी उन्हें अस्पताल ले गए थे, वह अभी वहीं हैं उनकी हालत काफी खराब है।

विक्की एकाएक उदास हो गया।

उसकी माँ ने पूछा, "क्या तुम मेरे साथ दादी जी को देखने चलोगे? चार बजे मैं अस्पताल जा रही हूँ।"

विक्की अपनी दादी को बहुत प्यार करता था। उसने तुरंत कहा, "हाँ, मैं आप के साथ चलूँगा।" वह स्कूल और स्वतंत्रता दिवस के समारोह के बारे में सब कुछ भूल गया।

स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह बहुत अच्छी तरह संपन्न हो गया। लेकिन प्राचार्य खुश नहीं थे। उन्होंने ध्यान दिया कि बहुत से छात्र आज अनुपस्थित हैं।

उन्होंने दूसरे दिन सभी अध्यापकों को बुलाया और कहा, "मुझे उन विद्यार्थियों के नामों की सूची चाहिए जो समारोह के दिन अनुपस्थित थे।"

आधे घंटे के अंदर सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों की सूची उन की मेज पर थी। कक्षा छे की सूची बहुत लंबी थी। अत: वह पहले उसी तरफ मुड़े।

जैसे ही उन्होंने कक्षा छे में कदम रखे, वहाँ चुप्पी सी छा गई। उन्होंने कठोरतापूर्वक कहा, "मैंने परसों क्या कहा था?"

"यही कि हम सब को स्वतंत्रता दिवस समारोह में उपस्थित होना चाहिए," गोलमटोल उषा ने जवाब दिया।

"तब बहुत सारे बच्चे अनुपस्थित क्यों थे?" उन्होंने नामों की सूची हवा में हिलाते हुए पूछा।

फिर उन्होंने अनुपस्थित हुए विद्यार्थियों के नाम पुकारे, उन्हें डाँटा और अपने डंडे से उनकी हथेलियों पर मार लगाई।

"अगर तुम लोग राष्ट्रीय समारोह के प्रति इतने लापरवाह हो तो इसका मतलब यही है कि तुम लोगों को अपनी मातृभूमि से प्यार नहीं है। अगली बार अगर ऐसा हुआ तो मैं तुम सबके नाम स्कूल के रजिस्टर से काट दूँगा।"

इतना कह कर वह जाने के लिए मुड़े तभी विक्की आ कर उन के सामने खड़ा हो गया।

"क्या बात है?"

"महोदय, विक्की भयभीत पर दृढ़ था, मैं भी स्वतंत्रता दिवस समारोह में अनुपस्थित था, पर आप ने मेरा नाम नहीं पुकारा।" कहते हुए विक्की ने अपनी हथेलियाँ प्राचार्य महोदय के सामने फैला दी।

सारी कक्षा साँस रोक कर उसे देख रही थी।

प्राचार्य कई क्षणों तक उसे देखते रहे। उनका कठोर चेहरा नर्म हो गया और उन के स्वर में क्रोध गायब हो गया।
"तुम सजा के हकदार नहीं हो, क्योंकि तुम में सच्चाई कहने की हिम्मत है। मैं तुम से कारण नहीं पूछूँगा, लेकिन तुम्हें वचन देना होगा कि अगली बार राष्ट्रीय समारोह को नहीं भूलोगे। अब तुम अपनी सीट पर जाओ।

विक्की ने जो कुछ किया, इसकी उसे बहुत खुशी थी। 

Tuesday, August 8, 2017

Kalidas and devi saraswati (Hindi Moral Story For Kids)

शिक्षाप्रद कहानी : संसार के दो मेहमान...  


महाकवि कालिदास रास्ते में थे। प्यास लगी। वहां एक पनिहारिन पानी भर रही थी।
 
कालिदास बोले : माते! पानी पिला दीजिए बड़ा पुण्य होगा।

पनिहारिन बोली : बेटा, मैं तुम्हें जानती नहीं। अपना परिचय दो। मैं पानी पिला दूंगी।
 
कालिदास ने कहा : मैं मेहमान हूं, कृपया पानी पिला दें।  

पनिहारिन बोली : तुम मेहमान कैसे हो सकते हो? संसार में दो ही मेहमान हैं- पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ कौन हो तुम?
 
(तर्क से पराजित कालिदास अवाक् रह गए।)  

कालिदास बोले : मैं सहनशील हूं, अब आप पानी पिला दें।
 
पनिहारिन ने कहा : नहीं, सहनशील तो दो ही हैं- पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका  बोझ सहती है, उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है, दूसरे  पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं। सच बताओ तुम कौन  हो?  

(कालिदास मूर्छा की स्थिति में आ गए और तर्क-वितर्क से झल्ला उठे।)
 
कालिदास बोले मैं हठी हूं।  

पनिहारिन बोली : फिर असत्य। हठी तो दो ही हैं- पहला नख और दूसरे केश, कितना भी  काटो, बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें कौन हैं आप?
 
(कालिदास अपमानित और पराजित हो चुके थे)  

कालिदास ने कहा : फिर तो मैं मूर्ख ही हूं।
 
पनिहारिन ने कहा : नहीं, तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो? मूर्ख दो ही हैं- पहला राजा जो बिना  योग्यता के भी सब पर शासन करता है और दूसरा दरबारी पंडित जो  राजा को प्रसन्न करने  के लिए गलत बात पर भी तर्क करके उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।  

(कुछ बोल न सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा पनिहारिन के पैर पर गिर पड़े और पानी की याचना में गिड़गिड़ाने लगे)
 
वृद्धा ने कहा : उठो वत्स!

(आवाज सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात माता सरस्वती वहां खड़ी थीं, कालिदास पुन: नतमस्तक हो गए)  

मां ने कहा : शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार से। तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठा इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग करना पड़ा।  

कालिदास को अपनी गलती समझ में आ गई और भरपेट पानी पीकर वे आगे चल पड़े।

सीख : विद्वता पर कभी घमंड न करें। घमंड विद्वता को नष्ट कर देता है। दो चीजों को कभी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए- अन्न के कण और आनंद के क्षण को।  

Tuesday, August 1, 2017

प्रजा धर्म और यूनान का राजदूत : Ashoka history (Hindi Moral Story For Kids)


मौर्य साम्राज्य में बार यूनान के राजदूत का आना हुआ तो उसने मौर्य साम्राज्य के महामंत्री चाणक्य की प्रशंशा प्रत्येक मनुष्य जो वंहा का रहने वाला और आस पास के लोगो के मुख से सुनी तो उसे भी चाणक्य से मिलने की इच्छा हुई कि देखूं तो सही इतना प्रभावशाली व्यक्ति है कौन आखिर ?

दरबार से पता पूछने के बाद राजदूत चाणक्य से मिलने के लिए उनके निवास स्थान गंगा के किनारे चल दिया ।वंहा पहुँचने के बाद देखता है कि गंगा के किनारे एक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी लम्बा चौड़ा पुरुष नहा रहा था । जब वह आदमी नहा कर कपड़े धोने लगा तो राजदूत ने पास जाकर उस व्यक्ति से पूछा कि क्या आप चाणक्य का घर जानते है इस पर उस व्यक्ति ने सामने एक झौंपडी की और इशारा किया ।

राजदूत को भरोसा ही नहीं हुआ कि किसी राज्य का महामंत्री इस साधारण सी झौंपड़ी में रहता होगा लेकिन फिर भी वो उस झौपडी की और चल पड़ा और भीतर जाकर उसने उस झौपडी को खाली पाया ।  यह देखकर राजदूत को लगा कि गंगा के किनारे उसे मिले उस व्यक्ति ने उसका मजाक बनाया है ऐसा सोचकर वो मुड़ने लगा तो क्या देखता है कि वही व्यक्ति उसके सामने खड़ा है ।

यह देखकर वो राजदूत उस व्यक्ति से कहने लगा ” अपने तो कहा था न कि चाणक्य यंही रहते है लेकिन यंहा तो कोई नहीं है अपने मेरे साथ मजाक किया है क्या ?” इस पर वह व्यक्ति कहने लगा महाशय मैं ही चाणक्य हूँ कहिये क्या प्रयोजन है ? इस पर राजदूत हैरान रह गया कहने लगा “मौर्य सम्राज्य के महामंत्री और इतनी सरल दिनचर्या और वो भी इस झौपडी में निवास , कमाल है विश्वाश ही नहीं होता ”

चाणक्य ने बड़ी सादगी से जवाब दिया कि अगर मैं महलों और राजभवन की सुविधाओं के बीच रहने लग जाऊ तो प्रजा के हिस्से में झोपडी आ जाएगी इसलिए मैं प्रजा धर्मं का निर्वहन करते हुए यंहा रहता हूँ ।

Sunday, July 30, 2017

संतोष का धन : Satisfaction is money (Hindi Moral Story For Kids)

पंडित श्री रामनाथ शहर के बाहर अपनी पत्नी के साथ रहते थे | एक जब वो अपने विद्यार्थिओं को पढ़ाने के लिए जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने उनसे सवाल किया ” कि आज घर में खाना कैसे बनेगा क्योंकि घर में केवल मात्र एक मुठी चावल भर ही है ?” पंडित जी ने पत्नी की और एक नजर से देखा फिर बिना किसी जवाब के वो घर से चल दिए |

शाम को वो जब वापिस लौट कर आये तो भोजन के समय थाली में कुछ उबले हुई चावल और पत्तियां देखी | यह देखकर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा ” भद्रे ये स्वादिष्ट शाक जो है वो किस चीज़ से बना है ??”  मेने जब सुबह आपके जाते समय आपसे भोजन के विषय में पूछा था तो आपकी दृष्टि इमली के पेड़ की तरफ गयी थी | मैंने उसी के पतों से यह शाक बनाया है | पंडित जी ने बड़ी निश्चितता के साथ कहा अगर इमली के पत्तो का शाक इतना स्वादिष्ट होता है फिर तो हमे चिंता करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है अब तो हमे भोजन की कोई चिंता ही नहीं रही |

जब नगर के राजा को पंडित जी की गरीबी का पता चला तो राजा ने पंडित को नगर में आकर रहने का प्रस्ताव दिया किन्तु पंडित ने मना कर दिया | तो राजा हैरान हो गया और स्वयं जाकर उनकी कुटिया में उनसे मिलकर इसका कारण जानने की इच्छा हुई | राजा उनकी कुटिया में गया तो राजा ने काफी देर इधर उधर की बाते की लेकिन वो असमंजस में था कि अपनी बात किस तरह से पूछे लेकिन फिर उसने हिम्मत कर पंडित जी से पूछ ही लिया कि आपको किसी चीज़ का कोई अभाव तो नहीं है न ??

पंडित जी हसकर बोले यह तो मेरी पत्नी ही जाने इस पर राजा पत्नी की और आमुख हुए और उनसे वही सवाल किया तो पंडित जी की पत्नी ने जवाब दिया कि अभी मुझे किसी भी तरीके का अभाव नहीं है क्योंकि मेरे पहनने के वस्त्र इतने नहीं फटे कि वो पहने न जा सकते और पानी का मटका भी तनिक नहीं फूटा कि उसमे पानी नहीं आ सके और इसके बाद मेरे हाथों की चूडिया जब तक है मुझे किसी चीज़ का क्या अभाव हो सकता है ?? और फिर सीमित  साधनों में भी संतोष की अनुभूति हो तो जीवन आनंदमय हो जाता है |

राजा बड़ी श्रद्धा से उस देवी के सामने झुक गये |

Anokhi Tarkeeb (Hindi Moral Story For Kids)

अनोखी तरकीब - पराग ज्ञानदेव चौधरी बहुत पुरानी बात है। एक अमीर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी। बहुत तलाश करने के बावजूद सामान न मिला और...